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मेरठ के बारें में
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मेरठ दो पवित्र नदियों गंगा और यमुना के बीच बसा हुआ है। मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का विकासोन्मुख व्यपारिक केन्द्र है। मेरठ के गंगा और यमुना के दोआब में स्थित होने के कारण वैदिक काल से ही मानवीय क्रियाकलापों का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है।

मेरठ का नाम संभवतः मयराष्ट्र से विकसित है अर्थात मय का प्रदेश। मय हिन्दु पौराणिक मान्यताओं के अनुसार असुरों का राजा था। उसकी पुत्री मंदोदरी रावण की पत्नी थी जो किं रामायण महाकाव्य में राम के विरोधी के रुप में था। महाभारत काल में कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर थी जो किं वर्तमान में मेरठ जिले के अंतर्गत आता है।

मध्य युग से इसकी इन्द्रप्रस्थ(वर्तमान दिल्ली) से निकटता के कारण भारत के राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है तथापि मेरठ की ओर इतिहासकारों का ध्यान सबसे पहले तब गया जब इसके बहादुर जाबांजों ने वुᆬतुबुक्तीन ऐबक (ग्यारहवीं शताब्दी) तथा तैमूर (चौदहवीं शताब्दी) की सेनाओं से कड़ा मुकाबला किंया। इसी समय से यह दिल्ली के शासकों के अधीन रहा है।

अंग्रेजों के सत्तासीन होने के उपरांत मेरठ एक बड़ा सेना का केन्द्र रहा है। 10 मई, 1857 को अंग्रेजी शासन के खिलाफ ब्रिटिश सेना के भारतीय जवानों द्वारा विद्रोह यहीं से आरंभ हुआ। उन्होंने मेरठ शहर पर एक दिन में ही नियंत्रण कर लिया तथा दिल्ली के लाल किंले की ओर वूᆬच कर दिया जो किं संपूर्ण भारत पर नियंत्रण का द्योतक था। उनके इस आभयान में साधारण लोग भी शामिल होते चले गए तथा देशभक्ति के नारे लगाते गए। अगली सुबह लाल किंला स्वाधीनता सेनानियों के कब्जे में था।

मेरठ से आरंभ हुई यह चिंगारी शीघ्र ही संपूर्ण देश में ज्वाला के रुप में पैᆬल गई तथा स्वाधीनता के राष्ट्रीय संघर्ष का रुप ले लिया। अंग्रेजों को इस स्वतंत्रता संग्राम को दबाने में एक वर्ष का समय लगा। तथापि मेरठ से आरंभ हुए इस स्वतंत्रता के आंदोलन ने संपूर्ण देश के राष्ट्र प्रेमियों को सदैव प्रेरित किंया। कालांतर में उन्नीसवीं शताब्दी में यही आंदोलन राष्ट्रीय आंदोलन का पथ प्रदर्शक बना। कृतज्ञ राष्ट्र ने वर्ष 2007 में स्वतंत्रता के इस आंदोलन की 150वीं वर्षगांठ अत्यंत भव्य रुप में आयोजित कर आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजली आर्पत की।

मेरठ को ''भारत का खेल नगर'' भी कहते हैं जिसका किं कारण यहां पर विशाल खेल उद्योग का होना है। यहां के अन्य बड़े उद्योग चीनी मिलें तथा इलैक्ट्रॉनिक्स से संबंधित हैं। मेरठ और निकट स्थित मोदीनगर राष्ट्रीय राजधानी के निकट एक बड़े शिक्षण केन्द्र के रुप में भी जाने जाते हैं।

मेरठ कैसे पहुंचें :

सड़क मार्ग : आ आईएसबीटी कश्मीरी गेट से गाजियाबाद होते हुए 70 किंलोमीटर। देहरादून से रुड़की होते हुए 175 किंमी।
रेल मार्ग : नई दिल्ली, निजामुक्तीन, पुरानी दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार से अनेक गाड़ियां मेरठ आती हैं।