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sda रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन संवितरण) मेरठ के बारे में dsa
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रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन संवितरण) मेरठ 1983 में अस्तित्व में आया। इसका कार्य उत्तर भारत में स्थित रक्षा पेंशन संवितरण कार्यालयों (डीपीडीओ) के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने में सहायता प्रदान करना है।

वर्तमान में रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन संवितरण) मेरठ संगठन 3.75 लाख पेंशनरों को 51 रक्षा पेंशन संवितरण कार्यालयों के माध्यम से सेवा प्रदान कर रहा है।

रक्षा पेंशन संवितरण कार्यालयों पर चार आंचलिक कार्यालयों (पें.सं.) के माध्यम से नियंत्रण रखा जाता है जो किं इलाहाबाद, दिल्ली छावनी,जालंधर तथा पठानकोट में स्थित हैं। रक्षा लेखा नियंत्रक (पें.सं.) मेरठ के विभिन्न अनुभाग निम्नलिखित महत्वूपर्ण कार्य करते हैं :-

(i) डीपीडीओ कार्यालयों में निर्धारित कार्यविधि के अनुसार कार्यनिष्पादन को सुनिश्चित करना।
(ii) डीपीडी कार्यालयों/आंचलिक कार्यालयों(पें.सं.) का निरीक्षण किंया जाना।
(iii) पेंशनरों की शिकायतों का समाधान किंया जाना।
(iv) अवधि वारित बकाया राशियों/एल टी ए दावों की स्वीकृति।
(v) जिन पेंशनरों के नाम मास्टर से हटा दिए गए हों उन नामों को पुनः मास्टर में शामिल किये जाने संबंधी स्वीकृति।
(vi) डीपीडीओ कार्यालयों में कम्प्यूटर हार्डवेयर के रख-रखाव के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करना।
(vii) संगठन में तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों को तकनीकी तथा कार्यविधि संबंधी विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किंया जाना।
(viii) संगठन से संबंधित न्यायालयीन मामलों में आवश्यक कार्रवाई करना।
(ix) संगठन के अधीन विभिन्न कार्यालयों को मूलभूत आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना।
(x) कर्मचारियों संबंधी कल्याणकारी मामलों तथा उनकी शिकायतों आदि के निपटान संबंधी संगठन की प्रशासनिक व्यवस्था बनाना।


इसी प्रकार आंचलिक कार्यालयों द्वारा भी डीपीडीओ कार्यालयों के दैनिक कार्यों के संबंध में उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करते हैं। वे मुख्य कार्यालय तथा डीपीडीओ कार्यालयों के बीच मध्यस्थ की भुमिका निभाते हुए डीपीडीओ कार्यालयों के कार्य को सुचारु रुप से चलाने में सहायता करते हैं। उनके द्वारा निम्नलिखित कार्य भी किये जाते हैं :-

(i) डीपीडीओ कार्यालयों द्वारा उनके मास्टर में किये गए संशोधनों की पश्च लेखा परीक्षा करना।
(ii) डीपीडीओ कार्यालयों का निरीक्षण
(iii) डीपीडीओ कार्यालयों द्वारा प्रेषित अवधिवारित दावों तथा मामलों की पडताल करना।
(iv) प्रशासनिक भूमिका।