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प्राय : पूछे जाने वाले प्रश्न
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एक रैंक के लिए एक पेंशन योजना के कार्यान्‍वयन पर भारत सरकार के दिनांक 17/1/2013 के आदेश पर बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्‍न ।
क्‍या यह आदेश उन पेंशनरों पर भी लागू होते हैं जिनकी पेंशन 1/1/2006 से ही आरम्‍भ होती है
हॉं, यह आदेश उन सभी पेंशनरों /परिवार पेंशनरों पर लागू होते हैं जिनकी पेंशन 1/1/2006अथवा इसके पूर्व आरम्‍भ हुई है ा
ऐसे परिवार की परिवार पेंशन पेंशन जिसका दिवंगत पति 31/8/99 को सेवा निवृत हुए हैं तथा परिवार पेंशन 1/4/2006 से आरम्‍भ हुइ है क्‍या उस परिवार की परिवार पेंशन इन आदेशों के अनुसार संशोधित की जाएगी ा
हॉं, परिवार पेंशन इन आदेशों के अनुसार सशोंधित की जाएगी क्‍योंकि मृतक सिपाही 2006से पहले सेवा निवृत हुआ है ,
जैसा कि अनेक पेंशनरों तथा उनकी एसोसिएशनों द्वारा यह विवाद का वषिय बना हुआ है कि इस संशोधन के उपरान्‍त बकाया राशियों का भुगतान 1/1/2006 से किया जाना चाहिए क्‍योंकि यह आदेश रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के दिनांक 11/11/2008 के आदेशों का संशोधन मात्र हैं ,स्‍पष्‍ट करें ा
क्‍योंकि इन आदेशों के प्रभावी होने का प्रावधान 24 सितम्‍बर 2012 से है , अत: पिछली अवधी के बकायों का भुगतान नही किया जाएगा ा
क्‍या अतिरिक्‍त पेंशन भी तदनुसार सशोधित की जाएगी ा
क्‍योंकि बढी हुई पेंशन 24/9/2012 से मूल पेंशन होगी अत: पेंशन भुगतान अधिकारी द्वारा अतिरिक्‍त पेंशन भी तदनुसार संशोधित की जाएगीा
किसी 2006 से पूर्व के सेना के पेंशनर त्र रैंक हवलदार ,श्रेणी घ त्र जिसकी अर्हक सेवा 15 वर्ष रही हो उसकी मूल पेंशन को 3500/- प्रति माह से 5301प्रति माह किए जाने का प्रावधान है ा क्‍या मूल पेंशन में इतनी अधिक वृध्दि नियमानुसार है ा
दिए गए उपरोक्‍त विवरण के अनुसार पेंशनर की मूल पेंशन रु0 3500 से 5301 किया जाना नियमानुसार है ा उपरोक्‍त दिए गए विवरण से यह स्‍पष्‍ट है कि पेंशन संवितरण अधिकारी द्वारा उक्‍त व्‍यक्ति की पेंशन को 1/7/2009 से ठीक प्रकार से संशोधित नहीं किया गया था , संबंधित व्‍यक्ति निम्‍नवत पेंशन प्राप्‍त करने का अधिकारी है ा
अधिकांश मामलों में ना तो पेंशनर द्वारा संवितरण प्राधिकारी के समक्ष आपकी पेंशन के संशोधन हेतु आवेदन किया गया है और ना ही पेंशन संवितरण प्राधिकारी को पेंशन स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी से कोई शुध्दि-पत्र पेंशन भुगतान आदेश अथवा अनुदेश प्राप्त हुए हैं ? कृपया इस विषय संबंधी प्रपत्र उपलब्ध कराएं ।
आदेशों में यह स्पष्ट लिखा है कि,पेंशन संवितरण प्राधिकारी द्वारा आदेशों के साथ संलग्न तालिकाओं के अनुरूप पेंशन संशोधन किया जाना है । संशोधन हेतु पेंशन स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी द्वारा अन्य कोई प्राधिकरण अथवा पेंशनर द्वारा आवेदन अपेक्षित नही है ।
परिपत्र सं. 501 तथा 502 में संलग्न तालिकाओं में 15 वर्ष से अधिक की अर्हक सेवा से आरम्भ किया गया है । 15 वर्ष से कम अर्हक सेवा करने वाले पेंशनर की पेंशन किस प्रकार संशोधित की जाएगी ।
पेंशन स्वीकृत कर्ता प्राधिकारी द्वारा पेंशन के निम्नलिखित घटकों /पेंशन के प्रकारों को संशोधित करना चाहिए । • विशेष पेंशन • अशक्तता पेंशन • 15 वर्ष से कम की अर्हक में विकलांगता पेंशन की सेवाघटक । • टीए कार्मिको के मामले में उनकी अर्हक सेवा को असम्बध्द रखते हुए सेवा पेंशन तथा । • युध्द आहत पेंशन तथा उदारीकृत विकलांगता पेंशन का सेवाघटक
 
पेंशन की गड़ना का उदाहरण
 
प्रकरण-I
पेंशनर का नाम ¬जे.एस.बाला
बैंक का नाम एसबीआई-चण्डीगढ़
पेंशन निकासी 26050/-      ( परिपत्र सं.-397)
श्रेणी कर्नल
अर्हक सेवा 26 वर्ष 5 माह
आरम्भ की तिथि 07/06/1990
नियमित सेवा का कमीशन प्राप्त अधिकारी होने के नाते,प्रधान रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन) के परिपत्र सं.500 के अनुलग्नक-क की तालिका सं.-1 के अनुसार संशोधन किया जाना चाहिए । अर्हक सेवा अवधि के लिए संगत पंक्ति में तथा रेंक के लिए संबंधित कालम में देखें । दिनांक 24-09-2012 से संशोधित पेंशन रू.27795/- प्रतिमाह होगी ।
प्रकरण-II
प्रकरण-II श्रीमती अमरजीत कौर
बैंक का नाम एसबीआई-मोहाली
पेंशन निकासी 8679/-      ( परिपत्र सं.-397 )
श्रेणी मेजर
आरम्भ की तिथि 19/07/1990
सेना के कमीशन प्राप्त अधिकारी का परिवार होने के कारण,रक्षा.ले.प्रधान नियंत्रक (पेंशन) के परिपत्र संख्या के अनुलग्नक “क” (तालिका सं.-2) के अनुसार पुनरीक्षण किया जाएगा । दिनांक 24-09-2012 से पुनरीक्षित पेंशन रू.10,923/- प्रतिमाह होगी ।
प्रकरण-III
पेंशनर का नाम         सुखविन्दर सिंह
बैंक का नाम एसबीआई-रोपड़
पेंशन निकासी 13500/-      ( परिपत्र सं.-397 )
श्रेणी MWO-Hony,Flying officer
अर्हक सेवा 34 वर्ष
आरम्भ की तिथि 01/01/1985
जन्मतिथि 08/12/1929
पेंशनर की वर्तमान पेंशन नियमानुसार नही है । रक्षा लेखाप्रधान नियंत्रक(पेंशन) के परिपत्र सं.482 दिनांक 19.04.2012 के अनुसार पहले से रू.13500/- प्रतिमाह से रू13590 तक बढाया जाना चाहिए तत्पश्चात परिपत्र सं.501 के अनुलग्नक तालिका सं.20 (वायुसेना) के अनुसार Rank तथा QS के अनुसार पुनरीक्षित पेंशन देखें । दिनांक 24/09/2012 से पुनरीक्षित पेंशन रू.15465/- होनी चाहिए । इसके अतिरिक्त,पेंशनर की आयु 80 वर्ष से अधिक होने के कारण वह संशोधित पेंशन के अनुरूप अतिरिक्त पेंशन का हकदार है ।
 
General FAQs
 
1986 से पूर्व के सेवानिवृत्ति मामलों में पेंशनर के PPO में उसकी अर्हक सेवा सामान्यतः अंकित नही होती है । कृपया ऎसे मामलों के नियमितीकरण की विधि बताएं ।
ऎसे मामलों में पेंशनर की र्हक सेवा सके मूल डिस्क्रिप्टिव रोल से अथवा शुध्दिपत्र पीपीओ (Cor.PPO) से देखी जा सकती है । इस सूचना की प्राप्ति का अन्य प्राधिकृत स्रोत पेंशनर को जारी की गई मूल सेवा मुक्ति पुस्तक /प्रमाणपत्र होता है ।
1. पहचान का महत्व क्या है?
प्रत्येक पेंशनर को 12 माह में एक बार स्वयं को पहचान के लिए उपस्थित करना चाहिए। विगत पहचान की तारीख को डीपीडीओ के कम्प्यूटर के मास्टर में अद्यतनीकृत किंया जाता है। यदि पेंशनर विगत पहचान की तिथि के 12 महीनों के भीतर अपनी पहचान नहीं कराता है तो पेंशन का भुगतान स्वतः ही निलंबित हो जाएगा।
श्रीमान “क” जो कि मानद नायब सूबेदार,समूह “घ” हैं तथा कुल 24 वर्ष की अर्हक सेवा पूर्ण की है,मूल वेतन के रूप में रू.7750/- प्राप्त कर रहे हैं । तथापि परिपत्र सं. 501 के साथ के साथ संलग्न तालिका-4(सेना) के अनुसार उनकी दिनांक 24/09/2012 से प्रभावी मूल वेतन रू.7601/- होनी चाहिए । कृपया इस मामले के नियमितीकरण हेतु सुझाव दें ।
ऎसे मामलों में संभवतः रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन) द्वारा न्यायालय के देशों के आधार पर पेंशन को संशोधित किया गया हो तथा शुध्दिपत्र पीपीओ जारी किए गए हों । अतःपीडीए द्वारा कोई कार्रवाई इस मामलों में अपेक्षित नहीं है ।
श्रीमान क डीएससी से पेंशनर है तथा नियमित सेना सेवा और डीएससी से दो पेंशनें प्राप्त कर रहे हैं । क्या पीडीए द्वारा दोनों पेंशनें संशोधित की जाएगी ।
इन आदेशों के अनुसार नियमित सेना की सेवा संबंधी पेंशन पीडीए द्वारा संशोधित नहीं की जाएगी । डीएससी में की गई सेवा के संबंध में संशोधन हेतु संदर्भ पीसीडीए (पेंशन) को भेजा जाएगा ।
1परिपत्र सं. 501 में डीएससी पेंशनरों के मामले में संलग्न तालिकाऎ अपूर्ण प्रतीत होती है । उदा.डीएससी के सिपाही के मामलें में तालिका केवल 23 वर्ष की अर्हक सेवा तक दर्शाती है । यदि डीएससी के सिपाही द्वारा 24 वर्ष या अधिक की अर्हक सेवा की हों तो उसकी पेंशन किस प्रकार संशोधित की जाएगी ।
डीएससी के सिपाही की अधिकतम सेवा अवधि 20 वर्ष होती है ।केवल 30.05.98 को सेवानिवृत्त हुए पेंशनर के मामले में इस सेवा अवधि को 23 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है । अतः इस प्रकार के मामलों में अर्हक सेवा अवधि को अधिकतम स्वीकार्य सीमा तक बढ़ाया जा सकता है,तथा तदनुसार पेंशन संशोधित की जा सकती है । परिपत्र सं.501 के अनुलग्नक –X में,JCOs /ORs के सेवारत रहने की अधिकतम अवधि की संपूर्ण सूची दी गई है ।
परिपत्र सं.502, के साथ डीससी कार्मिकों की,NOK हेतु सामान्य परिवार पेंशन संशोधित करने हेतु कोई तालिका संलग्न नही की गई है । ऎसे मामलों में संशोधन हेतु सुझाव दें ।
ऎसे डीएससी कार्मिकों के संबंध में, जो कि केवल डीएससी सेना के लिए पेंशन प्राप्त कर रहें है, नियमित सेना के पेंशनरों की दरों के अनुसार ही परिवार पेंशन संशोधित की जाएगी । लिपिकीय डयूटी तथा “अन्य श्रेणी डयूटी” पर तैनात डीएससी कार्मिक नियमित सेना के श्रेणी “Y” तथा श्रेणी “Z” के अनुसार परिवार पेंशन प्राप्त करने के हकदार हैं ।
इन आदेशों के अनुसार कौन से मूल फील्डस /डाटा अपेक्षित होते हैं ।
पेंशन का प्रकार-उदा. सेवानिवृत्ति पेंशन/सेना पेंशन/सामान्य परिवार पेंशन/विशेष परिवार पेंशन/युध्द आहत पेंशन/आश्रित पेंशन 2. पेंशनर का रैंक 3. पेंशनर का वर्ग(केवल JCO/PBOR के मामले में) 4. अर्हक सेवा (बिना Weightage के) 5. अभिलेख कार्यालय 6. आरम्भ की तिथि 7. सेवा निवृत्ति की तिथि
उपरोक्त सूचना पीपीओ अथवा संबंधित अभिलेख मे कैसे देखी जाएगी ।
1986 से पूर्व के सावानिवृत्ति के मामले मे सामान्यतःयह सूचनाएं पेंशनर के मूल पीपीओ में देखी जा सकती हैं । उन मामलों में जहाँ अपेक्षित सूचना पीपीओ अथवा पीडीए के अन्य अभिलेखों में उपलब्ध नही हों,उस अप्राप्य सूचना को संबंधित पीएसए से मंगाया जा सकता है ।
1986 से पूर्व के सेवानिवृत्ति मामलों में पेंशनर के PPO में उसकी अर्हक सेवा सामान्यतः अंकित नही होती है । कृपया ऎसे मामलों के नियमितीकरण की विधि बताएं ।
ऎसे मामलों में पेंशनर की र्हक सेवा सके मूल डिस्क्रिप्टिव रोल से अथवा शुध्दिपत्र पीपीओ (Cor.PPO) से देखी जा सकती है । इस सूचना की प्राप्ति का अन्य प्राधिकृत स्रोत पेंशनर को जारी की गई मूल सेवा मुक्ति पुस्तक /प्रमाणपत्र होता है ।
 
सामान्य प्रशन
 
1. पहचान का महत्व क्या है?
प्रत्येक पेंशनर को 12 माह में एक बार पहचान के लिए उपस्थित होना चाहिए। विगत पहचान की तारीख को डीपीडीओ के कम्प्यूटर के मास्टर में अद्यतनीकृत किंया जाता है। यदि पेंशनर विगत पहचान की तिथि के 12 महीनों के भीतर अपनी पहचान नहीं कराता है तो पेंशन का भुगतान स्वतः ही निलंबित हो जाएगा।
2. क्या पेंशनर अपनी वार्षिक पहचान अपने पेंशन भुगतान करने वाले बैंक की शाखा से करा सकता है?
पेंशनर बैंक की शाखा से अपनी पहचान करा सकता है। तथापि, उस व्यक्ति को बैंक प्राधिकारियों से यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए किं उसका जीवित होने संबंधी प्रमाण -पत्र तत्काल डीपीडीओ कार्यालय को भेज दिया जाए। यदि बैंक प्राधिकारियों द्वारा जीवित होने संबंधी प्रमाण पत्र भेजने में विलंब होता है। तो पेंशन का भुगतान स्वतः ही कम्प्यूटर द्वारा रोक दिया जाएगा।
3. पेंशन किंस समय अवधिवारित हो जाती है?
यदि पेंशन/परिवार पेंशन तीन वर्ष की अवधि तक नहीं आहरित की जाती अथवा पेंशनर/परिवार पेंशनर पहचान के लिए तीन वर्ष तक उपस्थित नहीं होता है, पेंशन अवधिवारित हो जाती है। अवधिवारित होने की अवधि के छूट हेतु सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक है, उसके उपरांत ही पेंशनर/परिवार पेंशनर को पेंशन संख्याबल पर पुनः लिया जाता है।
4. अवधिवारित बकायों के दावे पारित करने का अधिकार किंसे है?
अवधिवारित दावों को डीपीडीओ द्वारा स्वीकार किये जाने संबंधी शक्तियों का विवरण निम्नवत्‌ हैः-
(क) प्रथम पेंशन को एक वर्ष तक न लेने पर सभी प्रकार के पेंशनरों के संबंध में
(ख) कमीशन प्राप्त अधिकारियों, सिविलियनों तथा उनके परिवारों के मामले में तीन वर्ष तक तथा
(ग) अधिकारी रैंक से निम्न पेंशनर द्वारा पांच वर्ष तक पेंशनर तथा उसके परिवार द्वारा पांच वर्ष तक लगातार पेंशन न लेने पर
इससे अधिक अवधि होने पर रक्षा लेखा नियंत्रक को अवधिवारित समय को छोड़ने तथा डीपीडीओ के कम्प्यूटर मास्टर में उस मामले को पुनः शामिल करने की स्वीकृति देने का पूर्ण अधिकार है। अवधि की कोई सीमा नहीं है।
5. अवधिवारित बकायों के दावे के लिए प्रस्तुत किये जाने वाले आवश्यक दस्तावेज क्या हैं?
निम्नलिखित दस्तावेज, पेंशनर द्वारा, डीपीडीओ के समक्ष प्रस्तुत किये जाने चाहिए।
i) आईएएफ(सीडीए)-651 पर तीन प्रतियों में आवेदन जिसका किं भाग-। पेंशनर द्वारा भरा जाएगा, भाग-॥ दो अन्य पेंशनरों द्वारा भरे जाएंगे तथा भाग-॥ एवं ॥। को डीपीडीओ द्वारा साक्ष्यांकिंत किंया जाएगा।
ii) पेंशनर द्वारा पेंशन न लेने से संबंधित स्पष्टीकरण तथा उसकी पुष्टि में प्रस्तुत आवश्यक दस्तावेज यथा चिकिंत्सा प्रमाण पत्र (बीमार होने की स्थिति में), विदेश जाने की स्थिति में पासपोर्ट/वीजा की प्रति।
iii) पेंशन प्रमाण पत्र (पेंशन बुक)
iv) शपथ पत्र जिसमें किं निम्नलिखित सूचनाएं दी गई हों :-
  (क) पुनः सेवायोजन/सेवायोजित न होना।
  (ख) पुनः सेवायाजित होने की स्थिति में जिस अवधि के लिए बकाए का दावा किंया गया है, उस अवधि के लिए सेवायोजक द्वारा यह प्रमाण पत्र दिया जाना किं संबंधित व्यक्ति की विगत सेना सेवाओं की गणना उस सेवा में नहीं की गई है तथा उसका वेतन निर्धारण उसकी विगत सेवा के न्यूनतम के आधार पर नहीं किंया गया है अथवा उसके वेतन निर्धारण में पेंशन को शामिल नहीं किंया गया है।
  (ग) दावे की अवधि के दौरान किंसी न्यायालय ने उसे दंडित नहीं किंया है।
  (घ) पेंशनर के विदेश में रहने के दौरान उसकी राष्ट्रीयता को नहीं बदला गया है।
  (ड़) पुत्रियों के मामले में उनका विवाह नहीं हुआ है।
  (च) विधवाओं के मामले में उनके द्वारा पुनर्विवाह न किये जाने संबंधी प्रमाण पत्र।
6. किंसी पेंशनर अवधिवारित दावा प्राप्त होने पर डीपीडीओ द्वारा क्या कार्रवाई की जानी चाहिए?
डीपीडीओ द्वारा निम्नलिखित दस्तावेज तैयार किये जाएंगे तथा आंचलिक कार्यालय(पें.सं.) के माध्यम से मुख्य कार्यालय को भेजे जाएंगे।
i) मामले का विवरण जिसमें किं निम्नलिखित दस्तावेज होंगे :-
  (क) मामले का संक्षिप्त विवरण
  (ख) पेंशनर द्वारा पेंशन न लिए जाने के कारण
  (ग) कम्प्यूटर द्वारा स्वतः अथवा टीआर कोड 07 द्वारा पेंशन भुगतान निलंबित किंया गया।
  (घ) वुᆬछ मामलों में टीआर कोड 01 का भी प्रचालन किंया जाता है।
  (ड़) डीपीडीओ द्वारा प्रमाण पत्र जिसमें किं अंतिम भुगतान की तिथि दर्शाई गई तथा इसके साक्ष्य के रुप में चैक रजिस्टर की प्रति जिसे डीपीडीओ द्वारा विधिवत्‌ साक्ष्यांकिंत किंया गया हो।
  (च) डीपीडीओ द्वारा दावे की सत्यता एवं प्रमाणिकता पर टिप्पणी।
  (छ) विगत पहचान की तिथि
  (ज) वर्तमान पहचान की तिथि इत्यादि।
ii) डीपीडीओ तथा आंचलिक कार्यालय (पें.सं.) द्वारा विधिवत अधिकृत रुप से तैयार गणना शीट की तीन प्रतियां तथा दावा की गई राशि शब्दों तथा अंकों में
iii) पेंशन प्रमाण पत्र (पेंशन बुक - अंतिम भुगतान का माह एवं तिथि, पहचान की तिथि तथा मामले के अवधिवारित होने संबंधी बातों का भी वर्णन किंया जाए।)
iv) डिस्क्रेप्टिव रोल
v) मूल वेतन भुगतान आदेश जिसके द्वारा पेंशन आधसूचित की गई हो तथा संशोधित पेंशन भुगतान आदेश, यदि हो
vi) पेंशनर की पी सी फाइल
vii) डीपीडीओ द्वारा प्रमाण पत्र किं उसने आभलेख से यह पुष्टि कर ली है किं किये गए दावे की राशि का विगत में पेंशनर को भुगतान नहीं किंया गया है।
7. क्या विदेश में रह रहे पेंशनर द्वारा डीपीडीओ कार्यालय को अपने जीवित होने संबंधित प्रमाण पत्र प्रेषित किंया जा सकता है ?
हां, ऐसे मामलों में विदेश में रह रहे पेंशनर द्वारा भारतीय उच्चायोग, काउंसलेट अथवा दूतावास के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र भेजा जा सकता है। जीवित होने संबंधी प्रमाण पत्र का प्रपत्र यहां डाउनलोड किंया जा सकता है।
पेंशनरों के किंस वर्ग को जीवित होने संबधंी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की सुविध प्राप्त है?
8. पेंशनरों के निम्नलिखित वर्ग द्वारा पहचान के लिए उपस्थित होने के स्थान पर जीवित होने संबधंी प्रमाण पत्र दिए जा सकते हैं:-
पेंशनरों के निम्नलिखित वर्ग द्वारा पहचान के लिए उपस्थित होने के स्थान पर जीवित होने संबधंी प्रमाण पत्र दिए जा सकते हैं:-
1. विदेश में रहने वाले पेंशनर द्वारा डीपीडीओ को जीवित होने संबंधी प्रमाण भेजा जा सकता है। जीवित होने संबंधी यह प्रमाण पत्र उस देश में भारतीय उच्चायोग, काउंसलेट, दूतावास से प्राप्त किंया जा सकता है।
2. बीमार पेंशनर द्वारा भी जीवित होने संबंधी प्रमाण डीपीडीओ को भेजा जा सकता है। यह प्रमाण पत्र उस व्यक्ति की चिकिंत्सा कर रहे पंजीकृत चिकिंत्सा अधिकारी द्वारा दिया जा सकता है।
3. सरकारी विभागों अथवा सरकारी निकायों अथवा स्वायत्तशासी संस्थाओं में पुनः सेवायोजित पेंशनर द्वारा ये प्रमाण पत्र डीपीडीओ को भेजा जा सकता है। प्रमाण पत्र उस संस्था के अध्यक्ष/कार्यालय प्रधान द्वारा जारी किंया जाना चाहिए। उपरोक्त सभी मामलों में जीवित होने संबंधी प्रमाण पत्र को जारी करने वाले अधिकारी की मोहर लगी होना आवश्यक है।
In all the above circumstances, the Life Certificate should bear the seal of the office which issues the same.

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