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sd ऱले़नि़(पें.सं) का इतिहास dsa
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रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन संवितरण) मेरठ 1983 में अस्तित्व में आया। इसकी स्थापना का उद्देश्य डाकघरों तथा राज्य कोषागारों से पेंशन संवितरण का कार्य लेकर अपने स्तर पर आरंभ करना था।

वर्तमान में रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन संवितरण) मेरठ के अधीन 51 डीपीडीओ कार्यालय हैं। इन कार्यालयों के कार्यों पर निगरानी हेतु चार आंचलिक कार्यालय, दिल्ली,जालंधर, पठानकोट तथा इलाहाबाद में स्थित हैं जिनके अधीन क्रमशः 16 डीपीडीओ, आंचलिक कार्यालय दिल्ली में 14 डीपीडीओ कार्यालय, आंचलिक कार्यालय, पठानकोट में 16 डीपीडीओ कार्यालय, आंचलिक कार्यालय, जालंधर में तथा 04 डीपीडीओ कार्यालय आंचलिक कार्यालय, इलाहाबाद के अधीन हैं।

केवल सशस्त्र सेनाओं को अपनी सेवाएं देने वाले रक्षा लेखा विभाग के लिए डीपीडीओ कार्यालयों के माध्यम से सामान्य नागरिकों के साथ कार्य करना एक नया कार्यक्षेत्र था। इसके साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी को भी कार्य में शामिल किंया जाने की संभावनाओं पर भी विचार किंया जाना था। पेंशन का संवितरण अधिकांशतः दूर-दराज क्षेत्रों में, नकद रुप में किंया जाता था। इस प्रकार बड़ी मात्रा में नकद राशि का इन क्षेत्रों में ले जाना खतरनाक था। इसके लिए अनुसूचियां, जिनको किं पेंशन संवितरण हेतु नामावलियों के रुप में तैयार किंया जाता था, हाथ से बनाए जाते थे। इनको मस्टर-रोल कहा जाता था।

उपरोक्त समस्याओं के समाधान की दृष्टि से 1985 में नई बैंकिंग स्कीम (एनबीएस) लागू की गई। एन बीएस योजना के अंतर्गत पेंशनर की मासिक हकदारी उनके बैंक खातों में जमा कर दी जाती थी। इसके द्वारा वृद्ध पेंशनरों की कठिनाइयों के निराकरण के साथ दूर-दराज क्षेत्रों में नकद राशियां ले जाने की कठिनाई का भी समाधान हुआ। कम्प्यूटरीकरण के लागू होने के साथ प्रत्येक माह बार- बार मस्टर रोल तैयार किये जाने की समस्या का भी समाधान हो गया। इसके उपरांत नई पेंशन संवितरण प्रणाली(एनपीडीएस) तथा संशोधित नई पेंशन संवितरण प्रणाली (आरएनपीडीएस) 1988 तथा 1989 में लागू की गई जिसका उद्देश्य कम्प्यूटरीकृत प्रणाली को और अधिक श्रेष्ठ बनाना था।

प्रारंभ में पेंशन का संवितरण डीपीडीओ कार्यालयों द्वारा निर्धारित भुगतान केन्द्रों पर नकद रुप में किंया जाता था। वर्तमान में डीपीडीओ कार्यालयों द्वारा पेंशनरों की हकदारी उनके बैंक खातों में नई बैंकिंग योजना(एनबीएस) के अंतर्गत जमा कर दी जाती है। इसके द्वारा पेंशनर उनके निकटस्थ क्षेत्रों में स्थित बैंकों से पेंशन प्राप्त कर लेते हैं। इसके आतरिक्त डीपीडीओ कार्यालयों से पेंशन पाने वाले व्यक्तियों की वार्षिक पहचान बैंकों के माध्यम से भी किये जाने की सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा से उन्हें यह लाभ है किं बार-बार डीपीडीओ कार्यालय आए बिना वो डीपीडीओ की सेवाओं का उपयोग कर लेते हैं।